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*बाल संरक्षण में नवाचार: मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग के माध्यम से सैकड़ों परिवारों को लौटाई खुशियां —* *प्रवीण शर्मा*

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*बाल संरक्षण में नवाचार: मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग के माध्यम से सैकड़ों परिवारों को लौटाई खुशियां —* *प्रवीण शर्मा*

खंडवा
जिले में बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली है। न्यायपीठ बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग को एक सशक्त माध्यम बनाकर सैकड़ों बच्चों और उनके परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा रहा है।
आज के दौर में बाल शोषण, उपेक्षा, पारिवारिक विवाद, बाल श्रम और बाल अपराध जैसे मुद्दे बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को गहराई से प्रभावित करते हैं। ऐसे में केवल कानूनी हस्तक्षेप पर्याप्त नहीं होता, बल्कि बच्चों और उनके परिवारों को मानसिक रूप से सशक्त बनाना भी उतना ही आवश्यक होता है। इसी सोच के साथ प्रवीण शर्मा ने बाल संरक्षण के कार्यों में मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग को प्रभावी रूप से जोड़ा।
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि काउंसलिंग केवल कार्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रवीण शर्मा स्वयं जरूरतमंद परिवारों के घर जाकर उनसे संवाद करते हैं। घर के वातावरण में की गई काउंसलिंग से परिवार खुलकर अपनी समस्याएं साझा कर पाते हैं और समाधान अधिक प्रभावी तरीके से सामने आते हैं। यह मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण इस पहल को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।
कठिन परिस्थितियों में भी संवेदनशील हस्तक्षेप
प्रवीण शर्मा और उनकी टीम ने केवल औपचारिक मामलों तक ही अपने प्रयास सीमित नहीं रखे, बल्कि जहां भी जरूरतमंद बच्चे मिले—वहीं से सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की। मंदिरों, बाजारों, तीर्थ स्थलों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और गरीब बस्तियों जैसे स्थानों पर जाकर बच्चों की पहचान कर उनसे संवाद स्थापित किया गया। इन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों को न केवल संरक्षण प्रदान किया गया, बल्कि उन्हें काउंसलिंग के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया।
कई ऐसे बच्चे जो असुरक्षित माहौल, उपेक्षा या भटकाव की स्थिति में थे, उन्हें समझाइश, भावनात्मक सहयोग और मार्गदर्शन देकर शिक्षा, पुनर्वास और परिवार से जोड़ने की दिशा में कार्य किया गया। यह पहल बताती है कि यदि सही समय पर सही हस्तक्षेप हो, तो किसी भी बच्चे के जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है।
प्रदेश और अन्य राज्यों तक पहुंची पहल
इस नवाचार का प्रभाव अब केवल खंडवा जिले तक सीमित नहीं रहा है। मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के साथ-साथ महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, बिहार, हरियाणा, झारखंड, पंजाब और दिल्ली के विभिन्न जिलों के परिवार भी इस पहल से जुड़कर लाभान्वित हो रहे हैं। दूर-दराज के परिवार भी काउंसलिंग के माध्यम से मार्गदर्शन प्राप्त कर अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
काउंसलिंग के माध्यम से बच्चों के मन में बैठे डर, असुरक्षा और तनाव को दूर करने का प्रयास किया जाता है, वहीं अभिभावकों को सकारात्मक पालन-पोषण, संवाद और व्यवहार में सुधार के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है। विशेष रूप से ऐसे मामलों में जहां पारिवारिक विवाद या गलतफहमियों के कारण बच्चे प्रभावित होते हैं, काउंसलिंग एक मजबूत सेतु का कार्य कर रही है।
समाज में दिख रहा सकारात्मक बदलाव
इस पहल के परिणाम अब समाज में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। कई परिवार जो टूटने की कगार पर थे, वे पुनः एकजुट हुए हैं। बच्चों की शिक्षा में रुचि बढ़ी है, उनके व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आया है और अभिभावकों में भी जिम्मेदारी एवं जागरूकता का स्तर बढ़ा है। बाल श्रम और उपेक्षा के मामलों में कमी देखी जा रही है, जो इस प्रयास की सफलता को दर्शाता है।
शिक्षा और पुनर्वास की दिशा में ठोस पहल
इस पहल के अंतर्गत कई बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया और उनका स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित कराया गया। साथ ही, जिन बच्चों को परिवार का पूर्ण सहयोग नहीं मिल पा रहा, उन्हें आफ्टर केयर सेवाओं से जोड़कर उनके समुचित विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
प्रवीण शर्मा का मानना है कि “हर बच्चा सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल बचपन का हकदार है। यदि हम समय रहते उनकी भावनात्मक जरूरतों को समझ लें और उचित मार्गदर्शन दें, तो कई समस्याओं का समाधान सहज रूप से किया जा सकता है।”
खंडवा जिले में यह पहल अब एक मॉडल के रूप में उभर रही है, जिसे अन्य जिलों में भी अपनाया जा सकता है। मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग के माध्यम से बाल संरक्षण को नई दिशा देने का यह प्रयास समाज में स्थायी और सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव रख रहा है।

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